کد خبر ۵۵۳ ۳۹۸ بازدید انتشار : ۴ آبان ۱۳۹۵ ساعت ۱۶:۵۷

चूहों का हमला

आस पास के किसान उसी पानी से अपने खेतों और बाग़ों की सिंचाई करते थे। हर तरफ़ फ़सलें लहलहाती थीं, सब लोग खूब मज़े के साथ अच्छे मीठे और रसीले फल खाते थे।

चूहों का हमला

मैं एक चूहा हूँ, मुझे सब चूहों का सरदार कहते हैं मेरा घर यमन के एक जंगल में था, एम एक बुहत बड़े टीले के पास रहते थे। उस टीले के दूसरी तरफ़ एक बहुत बड़ा दरिया था जिसका पानी एक बुहत बड़े बाँध के अन्दर जमा होता था।

आस पास के किसान उसी पानी से अपने खेतों और बाग़ों की सिंचाई करते थे। हर तरफ़ फ़सलें लहलहाती थीं, सब लोग खूब मज़े के साथ अच्छे मीठे और रसीले फल खाते थे।

इस शहर में बड़े बड़े बाग़ थे। उनके मालिक खूबसूरत महलों और घरों में रहे थे। वह बुहत मालदार भी थे मगर थे बेहद कंजूस, इसिलिए किसी को अपने बाग से एक फल भी खाने नहीं देते थे। एक दिन एक नेक और भले इंसान ने उनसे कहा अगर तुम गरीबों और फ़कीरों की मदद नहीं करोगे तो ख़ुदावन्दे आलम तुम्हारे बागों और घरों को तहस नहस कर देगा और तुम्हारे सब खेत भी बरबाद हो जायेंगे।

उन्होंने उसकी बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया। उसी दिन मैंने अपने साथियों के साथ ख़ुदा के हुक्म से बाँध के ऊपर धावा बोल दिया हमने उसमें ख़ूब सारे बिल बनाए फ़िर उनको और बड़ा कर दिया, पानी बाँध से बाहर निकलने लगा अहिस्ता. आहिस्ता पूरा बाँध टूट गया चारों तरफ़ पानी फैल गया और सैलाब ने सारी जगह को अपने घेरे में ले लिया।

घर, बाग़ ज़मीनें, खेत सब पानी में डूबते चले गये और देखते देखते सब तबाह व बर्बाद हो गया तब उन लोगों को अपनी ग़लती का एहसास हुआ और उन्होंने कहा कि हमें गरीबों और फ़कीरों की मदद करना चाहिए थी।

मगर उस समय तक बहुत देर हो चुकी थी।

(सूरये सबा आयत 96 98 आधिरित)