کد خبر ۶۸۱ ۳۸۱ بازدید انتشار : ۱۶ آذر ۱۳۹۵ ساعت ۱۸:۳۳

इमाम ह़सन असकरी (अलैहिस्सलाम)

ऐसे हकीम को भेजने को कहा है जो फ़स्द खोल सके ( यानी मख़सूस रग काट कर इस से ख़राब ख़ून निकाल दे) इस लिए तुम इनके पास जाओ, लेकिन ये ध्यान रखना कि वह इश वक़्त आसमान के नीचे सब से बड़े आलिम हैं लेहाज़ा जो कुछ भी वह तुम से कहें इस के ख़िलाफ़ वरज़ी न करना

 इराक़ के शहर सामर्रा में एक मशहूर हकीम था जिस ने एक सौ साल से ज़्यादा उम्र पाई वह अपनी एक कहानी ख़ुद बयान करता है।

वह कहता है कि में अब्बासी बादशाह मुतवकुकिल के हकीम बख़तीशू का शागिर्द था। और इस ने मुझे अपना ख़ास शागिर्द बनाया था।

एक दिन इमाम ह़सन असकरी (अलैहिस्सलाम) ने इस के पास किसो को भेज कर कहलवाया कि अपने किसी ख़ास शागिर्द को मेरे पास भेज दो।

मेरे उस्ताद  बख़तीशू ने मुझे बुलाया और मुझ से कहा कि इमाम ह़सन असकरी (अलैहिस्सलाम) ने मुझ से ऐसे हकीम को भेजने को कहा है जो फ़स्द खोल सके ( यानी मख़सूस रग काट कर इस से ख़राब ख़ून निकाल दे) इस लिए तुम इनके पास जाओ, लेकिन ये ध्यान रखना कि वह इश वक़्त आसमान के नीचे सब से बड़े आलिम हैं लेहाज़ा जो कुछ भी वह तुम से कहें इस के ख़िलाफ़ वरज़ी न करना ।

जब मैं इमाम की ख़िदमत में पहुँचा तो आप ने मुझे एक कमरे में आराम करने के लिए कहा। जब मैं इमाम के पास पहुँचा तो वह वक्त फ़स्द खोलने के लिए अच्छा था। लेकिन आप ने मुझे इस वक्त बुलाया जब मेरी नज़र में वक़्त अच्छा नहीं था।

आप ने एक बड़ा तश्त ( टब जैसा बर्तन) मंगाया और मैंने आप की एक रग को फ़स्द किया तो इस से ख़ून निकलने लगा और पूरा तश्त खून से भर गया।

फ़िर इमान ने फ़रमाया: अब रग बन्द कर दो तो मैंने रग बन्द कर दी। इमाम ने इस पर पट्टी बाँध दी और मुझे मेरे कमरे में वापस भेज दिया और मेरे लिए ख़ूब सारा गरम पानी और ठन्डी चीज़ खाने के लिए लाई गयी।

मैं अस्र के वक़्त तक इसी तरह रहा फ़िर आप ने मुझे बुला कर कहा कि रग को खोल दो। मेंने फ़िर रग को खोल दिया इस से ख़ून निकलना शुरू हो गाय और तश्त भर गया। फ़िर ख़ून रोकने के लिए कहा तो मैंने खून बन्द कर दिया। आप ने इस पर पट्टी बाँध कर मुझे वापस कर दिया,

रात भर मैं वहीं रूका रहा। जब सुबह हो गयी और सूरज दिखाई देने लगा तो रग खोल दी इस बार आप के हाथ से दूध की तरह़ सफ़ेद ख़ून निकलने लगा जिस से तश्त भर गया फ़िर आप ने ख़ून रोकने के लिए कहा और रग का मुँह बन्द कर दिया और मुझे एक जोड़ा कपड़ा और पैसे दीनार देने का हुक्म दिया।

आप ने मुझे वह सामान देते हुए फ़रमाया कि इसे ले लो और मुझे माफ करना अब तुम जा सकते हो।

मैंने वह सब ले कर अर्ज़ किया अगर मेरे सर्दार कोई और हुक्म  हो तो मैं ह़ाज़िर हूँ। तो आप ने फ़रमाया नहीं।

मैं बख़तीशू के पास वापस गया और उसे पूरा वाकेया सुनाया तो बख़तीशू ने कहा सब हकीम इन्सान के जिस्म में जितना ख़ून बताते हैं यह उस से कहीँ ज़्यादा है।

और इस से अजीब बात ये है कि इस ख़ून के बाद दूध की तरह़ सफ़ेद खून निकला है।

फ़िर वह एक  घन्टे तक सोचता रहा और फ़िर तीन दिन तक इस ने अपनी सब किताबें टटोल डाली मगर उस दुनिया में ऐसा कोई वाक़ेया नज़र न आया।

इस ने कहा इस वक्त तमाम ईसाइयों में आकूल के गिरजाघर  के पादरी से बड़ा कोई हक़ीम और आलिम नहीं है लिह़ाज़ा तुम वहाँ चले जाओ। फ़िर इस ने उस पादरी को एक ख़त लिखा और उस में इमाम असकरी (अलैहिस्सलाम) का पूरा वाक़ेया बयान किया।

मैं वह ख़त ले कर उस के पास पुहंचा  और इसे आवाज़ दी इस ने गिर्जाघर की छत से मुझे देखा और कहा तुम कौन हो?

मैंने जवाब  दिया बख़तीशू का शागिर्द हूँ उस ने कहा क्या तुम्हारे पास उस का कोई ख़त है ? मैंने कहा हाँ तो उस ने ऊपर से एक टोकरी नीचे की तरफ़ छोड़ी मैंने ख़त उस के अन्दर रख दिया उस ने ऊपर खींच कर इसे पढ़ा तो उसी वक़्त गिरजाघर से नीचे आया। और पूछा क्या तुम ने ही उस शख़्स की फ़स्द (रग) खोली थी?

मैंने कहा हाँ, तो उस ने कहा तुम्हारी ख़ुश किस्मती का क्या कहना  फ़िर वह एक खच्चर पर सवार हो कर रवाना हो गया।

अभी एक तिहायी रात बाक़ी थी कि हम सामर्रा पहुँच गये। मैने कहा आप कहाँ जाना पसन्द करेंगे मेरे उस्ताद के घर या उस शख़्स से घर तो उसने कहा उसी शख्स के घर  ।

चुनांचे, हम सुबह की अज़ान से पहले उन के घर पहुँच गये तो हमारे लिए दर्वाजा खोला गया और काला गुलाम (नौकर) हमारे पास आया और उस ने कहा।

आप दोनो में से आकूल का पादरी कौन है? पादरी ने कहा मैं हूँ मेरी जान तुम पर कुर्बान उस ने कहा आप आ जाइये और मुझ से कहा तुम इनके और अपने खच्चर को देखते रहना जब तक कि पादरी बाहर न आजाये।

वह उन का हाथ पकड़ कर घर में ले गया।

मैं सुबह़ तक वहीं रुका रहा जब सूरज ऊपर आ यगा तो राहिब घर से बाहर आया। तो उस का हुलिया बदला हुआ था उस ने अपने पादरियों वाले कपड़े उतार कर सफ़ेद कपड़े पहन लिये थे और इस्लाम कुबूल कर लिया था।

फ़िर उस ने कहा कि अब मुझे अपने उस्ताद के घर ले चलो। हम बख़तीशू के घर पहुँच गये बखतीशू ने उसे जैसे की देखा दौड़ कर उस का इसतेक़बाल किया। और कहा तुम ने इसाई मज़हब क्यों छोड़ दिया है।

उस ने कहा मुझे हज़रत ईसा (अ.स.) मिल गये हैं और मैंने उन के हाथों पर इस्लाम कुबूल कर लिया है।

उस ने पूछा हज़रत ईसा (अ स) मिल गये हैं? उस पादरी ने कहा हाँ या उन के जैसा क्योंकि ये फ़स्द दुनिया में ह़ज़रत ईसा ( अ..स..) के अलावा किसी ने भी नहीं खुलवाया।

और ये बिलकुल उन्हीं के जैसे हैं। अल्लाह की आयतों और दलीलों में। फ़िर वह इमाम हसन असकरी (अ स)की ख़िदमत में वापस चला यगा और आप के सहबियों में शामिल हो गया यहाँ तक कि वह दुनिया से रूख़सत हो गया।

परवर दिगार इस की रूह पर रहमत नाज़िल फ़रमाये।