کد خبر ۶۹۶ ۲۶۹ بازدید انتشار : ۲۴ آذر ۱۳۹۵ ساعت ۱۸:۰۴

रोटी की क़द्र

लिह़ाज़ा इससे पहले कि रोटी पाँव के नीचे आये, अल्लाह के रसूल स. व. ने झुक कर रोटी को उठा कर अपने मुँह मे रखा और उसे खा लिया।ह़ज़रत मुहम्मद स. व. ने अपने इस काम के ज़रिये बताया कि हमें भी रोटी का एहतेराम करना चाहिए। और इस्राफ़ से पूरी तरह़ परह़ेज़ करना चाहिए।

रोटी की क़द्र

एक दिन अल्लाह के आख़री रसूल ह़ज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा अपने घर पर थे। उन्होंने ज़मीन पर एक रोटी का टुकड़ा पड़ा हुआ देखा। करीब था कि उन की ज़ौजा का पैर रोटी पर पड़ जाता। अगर उन का पाँव उस पर पड़ जाता तो रिज़्क़ की बे एहतेरामी होती।

उस के अलावा वह रोटी इस्तेमाल के लायक़ न रहती और ये काम इस्राफ़ ( फ़ुज़ूल ख़र्ची ) में शामिल हो जाता।

ह़ज़रत मुहम्मद स, व, हमेशा लोगों से कहते थे कि रोटी की बे एहतरामी न करो। ज़ाहिर है कि हैग़म्बरे अकरम स, व. इस बात पर हर्ग़िज़ राज़ी न होते कि उन के अपने घर में इस्राफ़ हो और रोटी का टुकड़ा पैरो तले आ जाये।

लिह़ाज़ा इससे पहले कि रोटी पाँव के नीचे आये, अल्लाह के रसूल स. व. ने झुक कर रोटी को उठा कर अपने मुँह मे रखा और उसे खा लिया।

ह़ज़रत मुहम्मद स. व. ने अपने इस काम के ज़रिये बताया कि हमें भी रोटी का एहतेराम करना चाहिए। और इस्राफ़ से पूरी तरह़ परह़ेज़ करना चाहिए।

आप ने अपनी ज़ौजा से फ़रमाया इस वक़्त अल्लाह की नेमतें जो तुम्हारे पास हैं इस की क़द्र करो क्योंकि अगर ये नेमतें भी हाथ से निकल गयीँ तो इतनी जल्दी वापस नहीं मिलेंगी।