کد خبر ۶۱۲ ۲۴۶ بازدید انتشار : ۱۶ آبان ۱۳۹۵ ساعت ۱۶:۴۳

दूध का एक गिलास

लड़की समझ गई थी कि इस लड़के को बहुत भूख लगी है, इसिलिए उसने दूध का एक गिलास लाकर लड़के को दिया। लड़के ने बड़े आराम के साथ दूध पिया और लड़की से कहने लगा कि इस दूध के किने पैसे हुए।?

दूध का एक गिलास

एक बार की बात है कि एक शहर मे एक बहुत ही गरीब लड़का  रहता था। लड़का ग़रीब ज़रुर था मगर बेहद हिम्मत वाला था।

वह अपने रोज़ाना के ख़र्ज को पूरा करने के लिए मज़दूरी करता था। इन दिनों वह गली मोहल्ललों में छोटी मोटी चीज़ें बेचकर अपने खाने पीने और पढ़ाई का ख़र्च निकाला करता था।

एक दिन वह एक मोहल्ले से गुज़र रहा था कि उसे वहुत ज़्यादा भूक का एहसास हुआ। उसने रूपये देखने के लिए अपनी जेब में हाथ डाला मगर उसे उस वक़्त भारी मायूसी हुई जब उसे पता चला कि जेब में सिऱ्फ़ एक ही सिक्का बाकी रह गया है और इस एक सिक्के से तो खाने पीने की कोई चीज़ ख़रीदी नहीं जा सकती है। उसने फैसला किया कि किसी पास के घर से कुछ खाने के लिए मांग लिया जाए ।

उसने एक घर का दर्वाज़ा खटखटाया। एक लड़की ने दर्वाज़ा खोला।

लड़के ने जब इस लड़की को देखा तो उसकी हिम्मत कुछ मांगने की नहीं हुए और उसने खाने के लिए कुछ मांगने के बजाय ख़ाली एक गिलास पानी ही तलब किया।

लड़की समझ गई थी कि इस लड़के को बहुत भूख लगी है, इसिलिए उसने दूध का एक गिलास लाकर लड़के को दिया। लड़के ने बड़े आराम के साथ दूध पिया और लड़की से कहने लगा कि इस दूध के किने पैसे हुए।?

लड़की ने जवाब दिया कि कुछ देने की ज़रूरत नहीं। हमारी माँ ने हमें सिखाया है कि नेकी करके उसका सिला मत मांगो लड़के ने उस लड़की का बड़े मोअद्दिबाना अंदाज़ में शुकिर्या अदा किया और वहाँ से चला गाया। सालों के बाद वह लड़की बीमार हो गई इस इलाके के डाक्टरों ने उसकी बीमारी का इलाज करने से मना कर दिया और उसे इलाज के लिए बड़े शहर भेज दिया ताकि शायद वहाँ के माहिर डाक्टर इस बीमारी का इलाज करने में कामियाब हो जाँए।

उस लड़की का मुआयना करने के लिए डाक्टर को बुलाया गया । जब डाक्टर को पता चला कि मरीज़ उस शहर से आया है तो उस पर एक अजीब सी कैफ़ियत तारी हो गई। तेज़ी के साथ उसने डाक्टर की मख़्सूस वर्दी पहनी और उस मरीज़ के कमरे की तरफ़ गया । जैसी ही वह कमरे में दाख़िल हुआ उसने पहली नज़र में लड़की  को पहचान लिया।

डाँक्टर ने अपने अमले को हुक्म दिया कि इस मरीज़ के इलाज के लिए जल्दी से सभी ज़रूरी क़दम उठाए जाएँ।

  उस लड़की की हर तरह़ से देखभाल की गई और उसका मेहनत और दिक्कत के साथ इलाज किया गया। और वह ठीक हो गई।

आज मरीज़ का अस्पताल में आख़री दिन था। अस्पताल के बिल को अदा करने के लिए वह लड़की बेहद परिशान और यह सोच रही थी कि शायद सारी उम्र इस अस्पताल का बिल अदा नहीं कर पाएगी । डाक्टर ने बिन अपने साप मंगवाया औऱ बिल के किनारे पर एख लफ़्ज़ लिखा औऱ उसे एक पैकैट में बंद करके लड़की के पास भेज दिया।

लड़की के हाथ में जब वह लिफ़ाफ़ा पुहँचा तो उसने परेशानी के आलम में इस लिफ़ाफ़े को खोला। उसे यह देखकर बहुत ताज्जुब हुआ कि बिल पर गिनती के बजाए कुछ लफ़्ज़ लिखे हैं।

लड़की ने धीरे से वह अल्फ़ाज़ पढ़े ।

बिल पर लिखा था इस बिल की आदायगी पहले ही दूध के एक गिलास की सूरत में हो चूकी है।

मेरे ख़्याल में डाँक्टर यह कहना चाहते थे कि नेकी की क़ीमत नहीं लगाई जा सकती।